संगठन के चुनावो की प्रक्रिया की समाप्ति के पश्च्यात आज अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के नवनिर्वाचित अध्यक्ष राहुल गाँधी ने औपचारिक तौर पर घोषणा की है कि देश की तमाम प्रदेश कांग्रेस कमेटियों के अध्यक्ष पदों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जायेगा और सभी प्रदेश कांग्रेस कमेटियों के वर्तमान अध्यक्ष अपने पद पर बने रहेंगे.
इसी घोषणा के साथ ये सुनिश्चित हो गया है कि राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान लोकप्रिय युवा नेता सचिन पायलट के हाथो में ही रहेगी. इस खबर के मिलते ही कांग्रेस पार्टी के प्रदेशभर के कार्यकर्ताओ में उत्साह की लहर दौड़ गयी और सोशल मीडिया पर बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया.
गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में हार के बाद एआईसीसी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने पायलट के हाथ में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की बागडोर सौंपी थी. चार वर्ष पहले पायलट प्रदेश के सबसे युवा अध्यक्ष के रूप में नियुक्त हुए थे, जिसके बाद से ही उन्होंने कड़ी मेहनत करके कांग्रेस पार्टी में नयी ऊर्जा का संचार किया. पिछले चार सालो में पायलट ने लगातार हर जिले का दौरा कर नेताओ से ले कर कार्यकर्ताओ तक पहुँच कर कांग्रेस पार्टी को राजस्थान में जमीन स्तर पर मज़बूत किया. फलस्वरूप कांग्रेस ने पायलट के नेतृत्व में पांच में से तीन उपचुनावों में अपनी जीत दर्ज़ करा के यह साबित कर दिया कि भाजपा के कांग्रेस मुक्त भारत के सपने को वे कभी पूरा नहीं होने देंगे.
ये पायलट की मेहनत का ही नतीजा है कि भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों से त्रस्त राजस्थान की जनता अब उम्मीद से कांग्रेस पार्टी की ओर देख रही है और इंतज़ार कर रही है कि कब मौका मिले और वे भाजपा की इस तानाशाही वाली सरकार को उखाड़ फेंके. प्रदेश में साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होंगे, लेकिन इससे पहले 29 जनवरी को अजमेर-अलवर लोकसभा सीट और मांडलगढ़ की विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना है, जिसके नतीजों से स्पष्ट हो जायेगा कि जनता किस पार्टी को बेहतर विकल्प के रूप में देख रही है.
इसी घोषणा के साथ ये सुनिश्चित हो गया है कि राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान लोकप्रिय युवा नेता सचिन पायलट के हाथो में ही रहेगी. इस खबर के मिलते ही कांग्रेस पार्टी के प्रदेशभर के कार्यकर्ताओ में उत्साह की लहर दौड़ गयी और सोशल मीडिया पर बधाइयों का सिलसिला शुरू हो गया.
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ये पायलट की मेहनत का ही नतीजा है कि भाजपा सरकार की जनविरोधी नीतियों से त्रस्त राजस्थान की जनता अब उम्मीद से कांग्रेस पार्टी की ओर देख रही है और इंतज़ार कर रही है कि कब मौका मिले और वे भाजपा की इस तानाशाही वाली सरकार को उखाड़ फेंके. प्रदेश में साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होंगे, लेकिन इससे पहले 29 जनवरी को अजमेर-अलवर लोकसभा सीट और मांडलगढ़ की विधानसभा सीट पर उपचुनाव होना है, जिसके नतीजों से स्पष्ट हो जायेगा कि जनता किस पार्टी को बेहतर विकल्प के रूप में देख रही है.


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