पूर्ण बहुमत एवं ऐतिहासिक जीत के साथ 2014 में भाजपा ने भारत की कमान संभाली थी और तभी से भाजपा का ध्यान उन सभी अनैतिक कार्यो पर है जो कांग्रेस के राज में कभी अंजाम तक नहीं पहुँच सके.
अंतराष्ट्रीय स्तर पर महात्मा गाँधी का बहुत ही सम्मान किया जाता है और भारत की आज़ादी में उनके योगदान के लिए उन्हें राष्ट्रपिता का दर्ज़ा भी दिया गया है. दूसरी तरफ नाथूराम गोडसे अंतराष्ट्रीय स्तर पर गाँधी के हत्यारे के रूप में प्रचलित है जिन्हे फांसी की सज़ा सुनाई गयी थी.
30 जनवरी 1948 को को नाथूराम गोडसे ने दिल्ली के बिड़ला भवन में महात्मा गाँधी की तीन गोलियाँ मार कर हत्या कर दी थी, जिसने पुरे देश को हिला कर रख दिया था. चूँकि नाथूराम राष्ट्रिय सेवा संघ एवं हिन्दू महासभा से जुड़े हुए थे, तो गाँधी की हत्या के तुरंत बाद RSS पर प्रतिबंद लगा दिया गया था, जो बाद में 1949 में हटाया गया.
लेकिन सत्ता में आते ही भाजपा ने नाथूराम को देशभक्त का दर्ज़ा दिलाने की कवायद शुरू कर दी. जिस नाथूराम की इतिहास में बहुत ही नकारात्मक छवि है, उसी के सम्मान के लिए भाजपा चोरी छिपे संघर्ष कर रही है. साथ ही साथ भाजपा और उससे जुड़े तमाम संगठन महात्मा गाँधी, जवाहरलाल नेहरू से ले कर राहुल गाँधी तक कांग्रेस के नेताओ को निशाना बना कर और संसाधनों का दुरूपयोग कर उनकी छवि को बिगड़ने के प्रयास में जुटे हुए है.
सिर्फ इतना ही नहीं बहुत से भाजपा शाषित राज्यों में देश के प्रथम प्रथानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से जुडी पाठ्य सामग्री को हटाने का भी प्रयास किया गया. एक तरफ प्रथानमंत्री नरेंद्र मोदी मौके-मौके पर महात्मा गाँधी को श्रद्धांजलि अर्पित करते है तो दूसरी तरफ उन्ही की पार्टी के कार्यकर्ता और उससे जुड़े लोग नाथूराम गोडसे की जयंती एवं पुण्यतिथि पर कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें याद करते है.
गौरतलब है कि कांग्रेस ने कई वर्षो तक शासन किया लेकिन कभी भी इस तरह का कोई प्रयास नहीं किया और ना ही कभी देश में चल रही आंतरिक राजनीति को अंतराष्ट्रीय स्तर पर उछाला. यदि नाथूराम गोडसे को एक सम्मानित देशभक्त का दर्ज़ा मिल जाता है तो भारत का इतिहास विश्व में मज़ाक बन कर रह जायेगा. जिस महात्मा गाँधी के नाम से पुरे विश्व में भारत की पहचान बनी है, जिस गाँधी का नाम भारत के साथ-साथ दुनिया के बहुत सारे देशो के इतिहास में दर्ज़ है उसी के हत्यारे को देशभक्त घोषित कर उनकी जयंती एवं पुण्यतिथि मनाना भाजपा की ओछी राजनीति की पोल खोलता है और इस तरह का प्रयास मात्रा भी निंदनीय है.
सोशल मीडिया के ज़रिय नाथूराम गोडसे की महानता के किस्सों को फैला कर युवा पीढ़ी को गुमराह किया जा रहा है, तो वही दूसरी तरफ महात्मा गाँधी और जवाहलाल नेहरू की छवि को बिगाड़ने का भी प्रयास लगातार जारी है.
Wikipedia English https://en.wikipedia.org/wiki/Nathuram_Godse
Wikipedia Hindi https://hi.wikipedia.org/wiki/%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A5%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%AE_%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%95_%E0%A4%97%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%B8%E0%A5%87
भाजपा इतिहास के साथ छेड़ छाड़ करने से भी नहीं चूँकि, नाथूरम गोडसे के विकिपीडिया के अंग्रेजी पेज जो कि तथ्यों पर आधारित है उसमे सच्ची कहानी बयां की गयी है, वही यदि आप हिंदी पेज देखेंगे जिसमे कोई भी बदलाव कर सकता है उसमे नाथूराम गोडसे के पक्ष में तमाम बाते लिखी गयी है, जिनका वास्तविकता से कोई सरोकार नहीं है. दोनों पेज की तुलना करे तो हिंदी में सिर्फ उन्ही बातो का उल्लेख किया है जो गाँधी की हत्या को सही ठहराए.
दरअसल विकिपीडिया आपकी स्थानीय भाषा में बदलाव करने की अनुमति तो देता है लेकिन अंग्रेजी भाषा को अंतरष्ट्रीय दर्ज़ा मिला हुआ है तो उसमे बिना किसी तथ्यों के बदलाव को विकिपीडिया नहीं स्वीकारता.
सोचने वाली बात ये है कि सत्ता का इस तरह का दुरूपयोग पहली बार हो रहा है, जहाँ अनैतिक तरीके से इतिहास को बदलने की कोशिश की जा रही है. पर इस तरह की राजनीति से अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को बहुत नुक्सान होगा.
ये पहला उदाहरण नहीं है, इससे पूर्व खुद प्रथानदमंत्री नरेंद्र मोदी ने खादी में महात्मा गाँधी की जगह लेनी की कोशिश, जहाँ चरखा चलते हुए गाँधी की जगह वे खुद बैठ गए थे. लेकिन भाजपा का ये दांव उल्टा पड़ गया, क्योकि गाँधी से जनता का भावनात्मक जुड़ाव है, इसलिए जनता ने मोदी के इस प्रयास का खुल कर विरोध किया उनकी कड़े शब्दों में निंदा की गयी और जनता ने जम कर आलोचना भी की. लेकिन बात बिगड़ती देख भाजपा ने सारा इलज़ाम DAVP पर डालते हुए पल्ला झाड़ लिया.
वैसे भाजपा हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है. सभी बड़े नेता खुले आम नाथूराम गोडसे के समर्थन में नहीं आ रहे है, क्योकि जनता का रुझान अभी स्पष्ट नहीं हो पा रहा है. खादी कांड के बाद मोदी समेत भाजपा के तमाम नेताओ एवं कार्यकर्ताओ को भी एहसास हो गया कि जनता महात्मा गाँधी का अपमान बिलकुल बर्दाश्त नहीं करेगी. अब ये तो वक़्त बताएगा कि नाथूराम को देशभक्त का दर्ज़ा दिलाने की भाजपा की ये गुप्त मुहीम क्या गुल खिलाती है?
यदि ऐसा कोई निर्णय लिया जाता है तो अंतरष्ट्रीय स्तर पर भारत को निशाना जरूर बनाया जायेगा कि जिस इंसान को अब तक हत्यारे का दर्ज़ा दिया जाता था वो अब अचानक देश भक्त कैसे घोषित कर दिया गया?




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