दुनिया के सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश भारत की राजनीति सबसे अनोखी है और कांग्रेस पार्टी विश्व की सबसे पुरानी पार्टी है जिसके इतिहास की चर्चा दुनिया भर में की जाती है. आज़ादी से लेकर नवभारत के निर्माण में कांग्रेस पार्टी का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान रहा है. भले ही आज की युवा पीढ़ी कांग्रेस के संघर्ष और मानव कल्याण के लिए दिए गए कांग्रेसजनो के बलिदान से वाखिफ़ ना हो, लेकिन किसी बुज़ुर्ग से चर्चा की जाये तो कांग्रेस पार्टी और इसके तमाम नेताओ का नाम सम्मान से लिया जायेगा.
आज़ादी के बाद कांग्रेस पार्टी ने गरीबो, आम जनता और किसानो के हित के लिए जो संघर्ष किया उसी का नतीजा है कि 21वीं सदी में आज भारत दुनिया के बड़े-बड़े देशो से प्रतिस्पर्धा करने के काबिल हुआ है. कांग्रेस पार्टी में बहुत से ऐसे नेता रहे जिन्होंने अपना पूरा जीवन किसानो के कल्याण में न्यौछावर कर दिया और अगर सबसे बड़े किसान नेता का उल्लेख किया जाये तो सबसे पहला नाम लिया जायेगा राजेश पायलट का, जिन्हे आज भी किसान याद करते है.
आज आपको रूबरू करवाते है भारत के सबसे बड़े किसान नेता के जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं से:
राजेश्वर प्रसाद सिंह बिधुरी से किसान नेता राजेश पायलट तक का सफर
राजेश पायलट का पूरा नाम राजेश्वर प्रसाद सिंह बिधुरी है, जिनका जन्म उत्तर प्रदेश के गाज़ियाबाद जिले में एक छोटे से गाँव वियद्पुरा में 10 फरवरी 1945 को एक गरीब किसान परिवार में हुआ. अपने राजनैतिक सफर की शुरुआत से पहले वे इंडियन एयरफोर्स में पायलट थे और इसलिए उन्होंने अपने नाम के साथ पायलट लगाया.
राजनीति में आने से पहले वे एयरफोर्स में स्क्वाड्रन लीडर थे, लेकिन अपने अच्छे मित्र राजीव गाँधी के आग्रह पर उन्होंने अपनी नौकरी से इस्तीफ़ा दे कर राजनीति में आने का फैसला किया.
राजनीति में राजेश पायलट की उपलब्धिया
कांग्रेस पार्टी के एक मज़बूत राजनेता के रूप में राजेश पायलट ने बहुत से चुनाव जीते और केंद्र सरकार में बहुत से मंत्री पदों पर रह कर देश को अपनी सेवाएं दी, लेकिन किसान परिवार से होने के कारण वे किसानो के दुःख-दर्द से जुड़ाव महसूस करते थे और इसिलए उनकी प्राथमिकता हमेशा किसानो के लिए संघर्ष करना ही रही.
1980 में राजस्थान के भरतपुर से वे लोकसभा का चुनाव जीत कर संसद में पहुँचे. उसके बाद 1984 में वे दौसा से सांसद रहे. 1985-89 में उन्होंने भूतल परिवहन मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दी और 1995-96 में के बार फिर वे भूतल परिवहन मंत्री बने. 1987 में उन्होंने जय जवान जय किसान ट्रस्ट की स्थापना की.
1987 से 1999 तक वे दौसा से लोकसभा का चुनाव लड़ते रहे और कभी भी कोई उन्हें हरा नहीं पाया. वर्ष 1991-93 में वे दूरसंचार मंत्री रहे तो कांग्रेस के अगले कार्यकाल वर्ष 1993-95 उन्होंने आंतरिक सुरक्षा मंत्री के रूप में देश की सेवा की, जिसके लिए आज भी उनका नाम सम्मान से लिया जाता है. उनके व्यक्तित्व की सबसे खास बात ये रही कि उनका सम्मान आमजन, किसान एवं कांग्रेस पार्टी के साथ-साथ विपक्षी दल भी करते है, जो कि भारतीय राजनीति में एक अनोखा उदाहरण है. राजेश पायलट की याद में इंडिया पोस्ट ने 11 जून 2008 को Rs.5 का एक स्मारक डाक टिकट जारी किया था.
11 जून 2000: अलविदा कह गया किसानो का मसीहा
11 जून 2000 को अपने संसदीय निर्वाचन क्षेत्र दौसा में भडाना के पास एक सड़क दुर्घटना में राजेश पायलट की मृत्यु हो गई, और मात्र 57 साल की उम्र में किसानो का मसीहा दुनिया को अलविदा कह गया. उनकी कार राजस्थान राज्य सड़क परिवहन की एक बस से जा टकराई थी, जिसमें वो बुरी तरह से घायल हो गए थे और अस्पताल पहुंचने के 45 मिनट बाद ही उनकी मौत हो गई थी।
इस खबर ने पुरे देश को हिला कर रख दिया था, क्योकि देश ने एक ऐसा नेता खोया था जो राजनीति से परे हट कर मानव कल्याण में निस्वार्थ भाव से जुटा हुआ था. कांग्रेस पार्टी के साथ-साथ किसानो के हक़ के लिए उठने वाली आवाज़ अचानक मौन हो गयी थी, जिसका शोक पुरे देश ने मनाया.
आज भी किसानो की यादो में ज़िंदा है राजेश पायलट
राजेश पायलट तो चले गए, लेकिन किसान उन्हें आज भी नहीं भुला पा रहे है. आज किसानो की जो दुर्दशा हो रही है, इस दुःख की घडी में बहुत से बुज़ुर्ग किसान राजेश पायलट को याद करके रो पड़ते है. इतना ही नहीं राजेश पायलट के बेटे सचिन पायलट में बुज़ुर्ग किसान उनके पिता की छवि देखते है. गत सर्दियों में सचिन पायलट ने दौसा जिले का दौरा किया, जहाँ उनकी मुलाकात एक गरीब किसान से हुयी, जो उनसे मिल कर भावुक हो गया और राजेश पायलट का जिक्र करते-करते उसकी आँखे भर आयी.
आज भी जब किसानो के साथ अत्याचार होता है या उन्हें नज़रअंदाज़ किया जाता है तो हर किसान को राजेश पायलट की कमी का एहसास होता है. देश इतनी उन्नति कर चूका है कि किसान वर्ग की वेदना सुनने का समय सत्ताधारी पार्टी के पास नहीं है. नेता बहुत है लेकिन कोई भी किसानो के हक़ के लिए संघर्ष करने के लिए आगे नहीं आता, जिससे की किसानो की आवाज़ दब कर रह गयी और मज़बूरी में उन्हें आत्म-हत्या करनी पड़ रही है.
ऐसे में अगर राजेश पायलट आज हमारे बीच होते तो शायद हालात कुछ ओर होते. किसान सचिन पायलट में उनकी छवि देखते है और इसलिए सचिन पायलट भी किसानो, गरीबो, मज़दूरों को प्राथमिकता देते हुए जब भी जरुरत पड़ती है उनकी सेवा के लिए तत्पर रहते है. काश सत्ता में बैठे लोग ये समझ पाते कि किसान एवं गरीब जनता सिर्फ़ वोट बैंक नहीं है और भारत को विकाशील देश से विकसित देशो की श्रेणी में लाने के लिए सभी वर्गों का विकास आवश्यक है.
किसान नेता स्व. श्री राजेश पायलट जी की 17वीं पुण्यतिथि पर उन्हें शत्-शत् नमन!





बहुत अच्छा लेख राजेश पायलट वास्तव में एक मसीहा ही थे किसानों के लिए
ReplyDeleteउनकी 17वीं पुण्यतिथि पर नमन
बहुत अच्छा लेख राजेश पायलट वास्तव में एक मसीहा ही थे किसानों के लिए
ReplyDeleteउनकी 17वीं पुण्यतिथि पर नमन
Jai jawan jai kishan jai Rajesh pilot jai congres
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