भाजपा सरकार का कार्यकाल देश की जनता के लिए काफी निराशाजनक रहा. जनता ने बहुत उम्मीदों के साथ भाजपा को प्रदेश-देश में कमान सौंपी थी, लेकिन आम जन की समस्याओ को अनदेखा कर सरकार ने जनता की भावनाओ के साथ खिलवाड़ किया है.
भाजपा सरकार के राज में सबसे ज्यादा समस्याओ का सामना अगर किसी को करना पड़ा है तो वो है किसान एवं कृषि से जुड़े लोग, लेकिन ये बहुत ही दुःखद है कि भाजपा सरकार ने देशभर में तकलीफ झेल रहे किसानो को कभी प्राथमिकता नहीं दी और उन्हें राहत पहुँचाने के कोई भी कार्य नहीं किये.
राजस्थान के इतिहास में पहली बार किसानो के हालत इतने बुरे हुए कि उन्हें आत्म-हत्या जैसे कदम उठाने पड़े. इसी के चलते राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी लगातार सरकार पर दबाव बना रही है कि भाजपा सरकार किसानो को राहत पहुँचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाये और ऋण माफ़ करके उनका बोझ कम करे, ताकि उन्हें मज़बूर हो कर कोई आत्मघाती कदम ना उठाना पड़े.
इसी के चलते मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने हालही में सोशल मीडिया के ज़रिये घोषण की है कि "प्रदेश के जिन किसानों का ऋण अवधिपार हो चुका है, ऐसे किसानों को सरकार ने राहत प्रदान करते हुए 31 मार्च, 2018 तक ऋण का चुकारा करने पर 50 प्रतिशत तक ब्याज़ माफ किया है।" गौरतलब है कि इतने आंदोलन एवं विरोध प्रदर्शन के बावज़ूद भी भाजपा सरकार ने सिर्फ़ ऋण के ब्याज़ में रहत दी वो भी मात्र पचास प्रतिशत, जिससे किसान ना तो सतुष्ट हुए है और ना ही सरकार के प्रति उनका आक्रोश कम हुआ है.
एक तरफ तो सीकर जिले के आक्रोशित किसानो ने सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल दिया है तो दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी किसानो के मुद्दों को ले कर लगातार सरकार को घेरने का काम कर रही है. गौरतलब है कि भाजपा शाषित दूसरे प्रदेशो में किसानो का ऋण माफ़ किया है लेकिन राजस्थान सरकार ने शुरू से ही कभी किसानो को प्राथमिकता नहीं दी. कुछ किसान इस घोषणा को अपमान भी समझ रहे है और उनका मानना है कि इस घोषणा से सिद्ध हो गया है कि वसुंधरा सरकार किसानो की समस्याओ को ना समझती है और ना ही उनके प्रति गंभीर है.
वीडियो देखे: UP और महाराष्ट्र के किसानो का ऋण माफ़ हो सकता है तो राजस्थान के किसानो का क्यों नहीं: पायलट
https://www.youtube.com/watch?v=n7rafMdHt-k
कांग्रेस पार्टी ने विभिन्न जिलों में किसान आक्रोश मार्च का आयोजन कर मांग रखी है कि सरकार ना सिर्फ किसानो का ऋण माफ़ करे बल्कि उन्हें राहत पहुँचाने के लिए उनकी फ़सल का उचित मूल्य दे, साथ ही साथ दुग्ध उत्पादकों को भी सहायता दी जाये. ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब वसुंधरा सरकार ने कांग्रेस पार्टी के दबाव में आ कर को कदम उठाया हो. इससे पूर्व भी बढ़ाई गयी बिजली दरों को कांग्रेस पार्टी के विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार को वापस लेने पर विवश होना पड़ा था.
सचिन पायलट सहित कांग्रेस के दिग्गज नेताओ ने किसानो के मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठा कर सरकार को घेरने का काम किया है. पायलट ने हालही में अपने 40 वें जन्म दिवस के अवसर पर मीडिया से मुख़ातिफ़ होते हुए सकरार को चेतावनी दी थी कि यदि किसानो का ऋण माफ़ नहीं किया तो कांग्रेस पार्टी सड़को पर उतर कर आंदोलन करेगी. वही नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी ने भी किसानो के हितो के लिए अपने जन्म दिवस के अवसर पर अनशन रख कर सकरार के ख़िलाफ़ आक्रोश व्यक्त किया था.
अभी हालही में प्रथानमंत्री नरेंद्र मोदी के राजस्थान दौरे से पहले भी पायलट ने प्रेस वार्ता कर गुहार लगाई थी कि मुख्यमंत्री उन्हें किसानो कि समस्याओ से अवगत करा किसानो के लिए कोई बड़ी घोषणा कराये लेकिन ऐसा हो नहीं पाया. इसे पूर्व भी पायलट ने आरोप लगाया था कि राज्य एवं केंद्र की सरकार के बीच तालमेल की कमी के चलते प्रदेश की जनता को कामियज़ा भुगतना पड़ रहा है.
खेर देर आये दुरुस्त आये, चार साल बाद ही सही सरकार ने किसानो के लिए कोई घोषणा तो की लेकिन ये मात्र ऊँट के मुंह में जीरे के समान है. एक बार फिर किसानो के हाथ निराशा ही लगी है, ऐसे में पायलट की चुनौती से प्रदेश के किसानो को बहुत उम्मीद है. उन्होंने चेतवनी दी है कि कांग्रेस पार्टी भाजपा सरकार को किसानो की समस्याओ का राजनैतिक लाभ नहीं उठाने देगी, उन्हें सहायता की अभी जरुरत है तो राहत की घोषणा भी जल्द की जाये ना कि चुनाव आने तक का इंतज़ार किया जाये.
अब देखना ये है कि भाजपा सरकार की इस घोषणा का क्या असर होता है? क्या भाजपा सरकार के राज में आंदोलन कर रहे किसान इस घोषण से संतुष्ट हो जायेगे? क्या कांग्रेस पार्टी की चेतवानी को गंभीरता से ले कर सरकार कोई ठोस कदम उठाएगी?



कांग्रेस पार्टी हमेशा जनहित के मुद्दों पर जनता के साथ खड़ी रहेगी। जय कांग्रेस
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