जब पायलट CM के गृह क्षेत्र में कर रहे थे किसानो के लिए संघर्ष तब वसुंधरा अजमेर में उपचुनावों की तैयारियो में रही व्यस्त

राजस्थान में जल्द ही दो लोकसभा एवं एक विधानसभा की सीट का उपचुनाव होने वाला है और सत्ताधारी  भाजपा सहित विपक्ष में बैठी कांग्रेस, दोनों ही पार्टियों के लिए ये उपचुनाव बहुत ही महत्वपूर्ण है. गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों में  जहाँ एक तरफ़ मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सहित भाजपा के तमाम मंत्रियो एवं नेताओ ने उपचुनाव की तैयारियां शुरू कर दी, वहीँ कांग्रेस पार्टी ने उपचुनाव की जगह पीड़ित किसानो को प्राथमिकता दी.

हालही में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी ने मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र एवं भाजपा के गढ़ हाड़ौती में 'किसान न्याय यात्रा' का आयोजन किया, जिसके तहत प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट, नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी, उपाध्यक्ष प्रमोद जैन भाया सहित कांग्रेस के हज़ारो कार्यकर्ताओ ने बारां से झालावाड़ तक लगभग 100 किलोमीटर पैदल यात्रा कर सरकार से किसानो के लिए न्याय माँगा.

3 अक्टूबर को कांग्रेसजनो ने बारां से यात्रा शुरू की और हाड़ौती के तमाम ग्रामीण क्षेत्रों में किसानो का हाल जानते हुए 6 अक्टूबर को झालावाड़ पहुँचे, जहाँ पर विशाल किसान सम्मलेन का आयोजन किया गया, जिसमे प्रदेशभर से आये हज़ारो किसान परिवारों ने अपनी उपस्तिथि दर्ज़ करा कांग्रेस की इस मुहीम को समर्थन दिया. स्थानीय जनता और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ कांग्रेस की ये 'किसान न्याय यात्रा' ऐतिहासिक रही, जिसका भाजपा को अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में भारी नुक्सान होने की सम्भावनाये है, वहीँ पायलट के खुद पैदल यात्रा करने से जनता के बीच कांग्रेस का एक सकारात्मक सन्देश भी गया है.

दूसरी तरफ़ कांग्रेस की किसान न्याय यात्रा की सफ़लता से भाजपा में बोखलाहट साफ़ देखी जा सकती है. भाजपा के तमाम मंत्रियो एवं नेताओ ने कांग्रेस की इस मुहीम को राजनीति करार देते हुए बयानबाज़ी शुरू कर दी. लेकिन किसान न्याय यात्रा के बाद सचिन पायलट ने एक बार फिर प्रदेश की जनता का दिल जीत लिया.

पायलट अजमेर से सांसद रहे है और अभी प्रदेश कांग्रेस की बागडोर उन्ही के हाथ में है तो जाहिर सी बात है कि अजमेर लोकसभा सहित अन्य दोनों उपचुनाव उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है. उपचुनाव की घोषणा कभी भी हो सकती है, लेकिन पायलट ने चुनाव की तैयारियो से ज्यादा किसानो के लिए संघर्ष करना उचित समझा.

झालावाड़ में विशाल किसान सम्मलेन को सम्भोदित करते हुए भी उन्होंने यही कहा कि प्रदेश में किसान बहुत पीड़ित है और उनको मदद की अभी जरुरत है. उन्होंने भाजपा सरकार से आग्रह भी किया कि वे अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावो का इंतज़ार ना करे, किसानो को प्राथमिकता देते हुए उन्हें जल्द से जल्द राहत पहुँचाये. पायलट ने भाजपा सरकार को चुनौती भी दी कि कांग्रेस का संघर्ष तब तक ज़ारी रहेगा, जब सरकार किसानो की मांगे नहीं मान लेती. उन्होंने कहा कि किसानो की मांगो के आगे भाजपा सरकार को झुकना ही होगा.

जहाँ एक तरफ़ कांग्रेस आम जनता एवं किसानो से जुड़े मुद्दों की बात कर रही है, वही दूसरी तरफ़ मुख्यमंत्री सहित भाजपा के तमाम मंत्रियो एवं नेताओ के बयानों में उपचुनाव के आलावा ओर कोई मुद्दा नहीं है. जब पायलट तेज़ धुप में किसानो के हितो के लिए हाड़ौती की सडको पर पैदल चल रहे थे, वहीँ दूसरी तरफ़ मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अजमेर में उपचुनाव की रणनीति बनाने में व्यस्त रही.  सिर्फ इतना ही नहीं स्वयं भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने पुष्कर में बैठक के बाद एक निजी चैनल को दिए बयां में सिर्फ आगामी उपचुनाव की बात कर कांग्रेस और पायलट को ललकारा तो सही लेकिन आम जनता की समस्याओ पर चर्चा करना जरुरी नहीं समझा.

मालूम हो कि हालही में जयपुर नगर निगम के वार्ड 76 के उपचुनाव में कांग्रेस के इकरामुद्दीन ने भाजपा प्रत्याशी को 5232 वोट से हरा ऐतिहासिक जीत दर्ज़ की है, जो जनता की ओर से भाजपा सरकार को एक संकेत है कि कहीं ना कहीं जनता का रुझान कांग्रेस पार्टी की ओर बढ़ रहा है. ख़ैर, जल्द ही प्रदेश में अजमेर एवं अलवर लोकसभा सीटों एवं मांडलगढ़ विधानसभा सीट का उपचुनाव होने वाला है, जिनके नतीजों से ये स्पष्ट हो जायेगा कि जनता अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावो में किस पार्टी को समर्थन देगी. 

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