सचिन पायलट ने की घोषणा, दलित-दिव्यांग किसान मंगलचंद का क़र्ज़ चुकायेगी कांग्रेस; परिवारजनों से मुलाक़ात कर हिम्मत बँधायी
गतदिनों नागौर जिले के चारणवास गाँव में एक किसान मंगलचंद मेघवाल ने आत्म-हत्या कर ली. बताया जा रहा है कि मंगलचंद के परिवार पर पंजाब नेशनल बैंक से लिए पौने पांच लाख का क़र्ज़ बकाया था, जिसके भुगतान के लिए बैंक एवं पुलिस प्रशासन निरंतर दबाव बनाने के साथ-साथ ही मानसिकरूप से प्रताड़ित भी किया जा रहा था, जिसके चलते उन्होंने आत्मघाती कदम उठाया.
आज दोपहर राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट चारणवास पहुँचे, जहाँ उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाक़ात कर उन्हें हिम्मत बँधायी और स्थानीय ग्रामीणों से बातचीत कर मामले की पूरी जानकारी ली. उन्होंने घोषणा की है कि मेघवाल परिवार के पौने पांच लाख के क़र्ज़ के भुगतान की जिम्मेदारी कांग्रेस पार्टी ले कर चुकायेगी.
पायलट ने कहा कि यह बहुत ही निंदनीय घटनाक्रम है कि एक ओर मुख्यमंत्री वसुंधरा जी 'राजस्थान गौरव यात्रा' के ज़रिय सरकारी खर्च पर पार्टी के प्रचार-प्रसार में जुटी हुयी है तो दूसरी तरफ नागौर जिले के चारणवास गाँव में एक दलित, दिव्यांग लघु किसान को क़र्ज़ के बोझ तले मज़बूर हो कर आत्म-हत्या करनी पड़ी. सत्ता के नशे में चूर अपनी गौरव यात्रा में व्यस्त वसुंधरा जी को प्रदेश के किसानो की शव यात्रा नज़र ही नहीं आ रही है.
उन्होंने कहा कि आश्चर्य है कि जिस देश में भाजपा सरकार ने बड़े-बड़े धन्नासेठो का हज़ारो-करोड़ो का कर्ज़ा माफ़ कर दिया, वहीँ खुद को किसानो का मसीहा बोलने वाली इस भाजपा सरकार के राज में किसानो को आत्म-हत्या करने पर मज़बूर होना पड़ रहा है. जिस बैंक से नीरव मोदी जैसे लोग हज़ारो-करोड़ो का कर्ज़ा ले कर फरार हो गए, उसी बैंक ने मंगलचंद जैसे लघु किसान पर मात्र कुछ लाख के कर्ज़े के भुगतान के लिए ना सिर्फ़ दबाव बनाया गया, बल्कि ज़मीन के कुड़की (नीलाम) करने की धमकी सहित गाँव भर में लाउड स्पीकर के ज़रिय एलान करवा कर अपमानित भी किया.
पायलट ने कहा कि एक गरीब किसान परिवार को जिस तरह से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया है उससे ये स्पष्ट हो जाता है कि किसानो की हितेषी होने का दावा करने वाली भाजपा सरकार किसानो के प्रति ना तो गंभीर है और किसानो के हितो के सारे दावे भी खोखले है. पीड़ित किसान परिवारों को सहायता पहुँचना तो दूर आज मंगलचंद जी की मृत्यु को पूरे चार दिन हो है लेकिन भाजपा का कोई मंत्री या नेता सूद लेने तक नहीं आया।
जहाँ किसानो की शव यात्रा निकल रही हो, वहाँ की मुखिया जी को गौरव यात्रा छोड़ जनता की सूद लेनी चाहिए, लेकिन ये साबित हो गया है कि भाजपा की कथनी और करनी में बहुत फ़र्क है, चुनावो में किसानो को अन्नदाता का दर्ज़ा दे कर बड़े-बड़े वादे करने वाली भाजपा ने सत्ता में आने के बाद किसानो को प्राथमिकता ही नहीं दी. भाजपा का एक मात्र लक्ष्य सत्ता में बने रहना है.



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